Dhanteras 2021 : क्यों मनाया जाता है धनतेरस? भगवान धनवंतरि की पूजा क्यों की जाती है?

धनतेरस सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह दीपावली के दो दिन पहले मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार ​कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी वाले दिन धनतेरस पड़ती है। इस दिन भगवान धन्वतरि, भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। धनतेरस पर्व में धन-धान्य के साथ अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि पहला सुख निरोगी काया और दूसरा सुख पास में माया। यह पर्व पहले सुख की बात कर रहा है। धन की उपासना से पहले धनतेरस का ये पर्व आरोग्य की उपासना के महत्व को हमें समझाता है। क्योंकि धन कमाने के लिए स्वास्थ्य अच्छा होना जरूरी है।

भगवान धनवंतरि की पूजा क्यों की जाती है?

धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरि की पूजा की जाती है। भगवान धनवंतरि को आरोग्य का देवता कहा गया है। वे पृथ्वी के पहले चिकित्सक भी कहे जाते हैं। इस दिन भगवान धनवंतरि से अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। यह पर्व शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, आर्थिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का संकल्प लेने का मौका देता है।

क्या है धनतेरस की पौराणिक कथा?

वैसे, धनतेरस की कई पौराणिक कथाएं हैं। इनमें से जो सबसे प्रमुख है वह है समुद्र मंथन की कथा। समुद्र मंथन की पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन ही भगवान धनवंतरी अमृत कलश लेकर समुद्र से प्रकट हुए थे, इसलिए उनके अवतरण दिवस के रूप में धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है और उनका पूजन होता है। भगवान धनवंतरी को औषधि और चिकित्सा का देवता माना जाता है। वह खुद भगवान विष्णु के अंशावतार है और संसार को आरोग्य प्रदान करते हैं।

इसके अलावा, धनतेरस पर्व मनाने के पीछे भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा का भी उल्लेख आता है। भागवत पुराण के अनुसार, धनतेरस के दिन ही वामन अवतार ने असुरराज बलि से दान में तीनों लोक मांगकर देवताओं को उनकी खोई हुई संपत्ति और स्वर्ग प्रदान किया था। इसी उपलक्ष्य में देवताओं नें धनतेरस का पर्व मनाया था।

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