Climate Change : राजधानी दिल्‍ली की जहरीली हवा का जिम्‍मेदार कौन है? 

अभी हाल ही में दीपावली का पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया गया। कुछ जगह पटाखों पर पाबंदी थी तो कुछ जगह भरपूर छूट। दिल्लीवालों की शहर दिल्ली में लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। अब इस बात पर सियासत गरमा चुकी है। दरसल दीवाली पर दिल्ली-एनसीआर की हवा इतनी खराब हो गयी कि दिल्लीवासियों को सांस लेने में परेशानी शुरू हो गई है। इसी बात पर पक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गये हैं।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने दिल्ली की प्राणहारी हवा के पीछे भाजपा को आड़े हाथों लिया है। राय ने प्रतिबंध के बावजूद दीवाली के मौके पर लोगों के पटाखे जलाने के लिए भाजपा को पूरी तरीके से जिम्मेदार ठहराया है। और नतीजतन भारतीय जनता पार्टी ने गोपाल राय की बात को ऊलजलूल बताते हुए जोरदार पलटवार किया। भाजपा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल सरकार वायु प्रदूषण को काबू करने में नाकाम रही है। केजरीवाल सरकार जानबूझकर हिंदूओं के त्योहार पर विधवा विलाप कर रही है।

भाजपा के आईटी विभाग के राष्ट्रीय प्रभारी अमित मालवीय ने ट्वीट किया, ‘पटाखे जलाए जाने से पहले ही दिल्ली का AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका था। अन्यथा सुझाव दे रहे लोग अरविंद केजरीवाल को अच्छा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं, जिन्होंने दिल्ली वालों को पटाखे जलाने से रोकने के लिए एक द्वेषपूर्ण अभियान चलाया था।’

जहरीली हवा का जिम्‍मेदार कौन है? 

अगर हवा प्रदुषित होगी तो इसका खामियाजा सभी को भुगतान होगा। चाहे वो भाजपाई हो या ‘आम आदमी’। सियासतदारों के स्वार्थ के कारण दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) की पांच करोड़ की आबादी साफ हवा के लिए पल पल संघर्ष कर रही है। आसमान को धुंध की चादर ने कवर कर दिया है। विजिबिलिटी कई जगहों पर 25 मीटर तक सीमित हो गई है। लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। जिम्मेदार कौन है? सिस्टम? सियासत? या दीवाली का त्योहार?

सच्चाई यह है कि हमारे पास इस सवाल का जवाब नहीं है। हर बात पर ‘Whataboutery’ करना हमारी आदत बन चुकी है। ये बात सत्य है कि दीपावली साल में एक दिन ही आती है। बाकी के 364 दिन हम क्या करते हैं? जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पर हम मुखर होकर बात क्यों नहीं करते? समय आ चुका है कि हम सत्ताधारियों से अपने हक की बात करें। उनसे पूछें कि इस दमघोंटू हवा का जिम्मेदार कौन है? प्रदुषण को हराने के लिए हमारी तैयरियां क्या है? देश की राजधानी गैस चैंबर में तब्दील क्यों हो रही है? खैर ऐसे भी अब्दुल हमीद अदम ने कहा है –
“सवाल कर के मैं ख़ुद ही बहुत पशेमाँ हूँ
जवाब दे के मुझे और शर्मसार न कर”

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