एलजीबीटीक्यू (LGBTQ) किसे कहते हैं? क्वीयर की परिभाषा क्या है?

हम अक्सर सोशल मीडिया (Social Media) पर LGBTQ से जुड़े बहुत सारे MEMES, विज्ञापन और एक्टिविज्म देखते हैं। मगर फिर भी ज्यादातर लोग इस बात से अनभिज्ञ हैं कि आखिर LGBTQ का पूरा मतलब क्या है?

LGBTQ का मतलब क्या है?

LGBTQ में L का मतलब लेस्बियन (Lesbian), G का मतलब गे (Gay), B से बायसेक्सुअल (Bisexual), T यानी ट्रांसजेंडर (Transgender) और Q का मतलब क्वीयर (Queer) होता है। अब हम हर एक शब्द को विस्तार से समझने की कोशिश करेंगे।

लेस्बियन (Lesbian)

लेस्बियन यानी कि एक ऐसी महिला या लड़की जो समान लिंग के प्रति सेक्सुअली आकर्षित हैं। उन्हें मर्दों में कोई दिलचस्पी नहीं होती है। साफ सरल शब्दों में समझें तो जो महिला लेस्बियन होगी, वह दूसरी महिलाओं के प्रति सेक्सुअली आकर्षित होगी।

गे (Gay)

जब एक आदमी दूसरे आदमी से ही सेक्सुअली आकर्षित हो तो उसे गे कहते हैं। जो ‘गे’ होते हैं उन्हें औरतों में ज्यादा दिलचस्पी नहीं होती है। उनका रुझान मर्दों की ओर ही होता है। ‘गे’ शब्द का इस्तेमाल कई बार पूरे समलैंगिक समुदाय के लिए भी किया जाता है, जिसमें ‘लेस्बियन’, ‘गे’, ‘बायसेक्सुअल’ सभी आ जाते हैं। 

बायसेक्सुअल (Bisexual)

वह लोग बायसेक्सुअल हुए जो मर्द और औरत दोनों से ही सेक्सुअली आकर्षित हो और उनमें रुचि रखते हो। यानी की बायसेक्सुअल मर्द और औरत दोनों ही हो सकते हैं। गौरतलब है कि ब्रिटेन में की गई एक शोध के मुताबिक दुनिया की अधिकतर महिलाएं बायसैक्सुअल होती हैं।

ट्रांसजेंडर (Transgender)

ट्रांसजेंडर शब्द उन लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है जिनकी एक लैंगिक पहचान या अभिव्यक्ति उस लिंग से अलग होती है, जो उन्हें उनके जन्म के समय दी गई होती है। कुछ ट्रांसजेंडर लोग लिंग-परिवर्तन के लिए चिकित्सा सहायता लेने की इच्छा भी रखते हैं।

क्वीयर (Queer)

यह एक दुविधा में फंसे लोगों की श्रेणी है। यह वो लोग होते हैं जो अपने बारे में तय नहीं कर पाते हैं कि उनका शारीरिक चाहत पुरुष की ओर है या फिर स्त्री की ओर। यानी जो ‘क्वीयर’ होते हैं वो ना खुद को आदमी, औरत या ‘ट्रांसजेंडर’ मानते हैं और ना ही ‘लेस्बियन’, ‘गे’ या ‘बायसेक्सुअल’।

धारा 377 हटने से क्या बदलवा आया?

सुप्रीम कोर्ट ने 6 सितंबर, 2018 को एक ऐतिहासिक फैसला दिया था। इस दिन अंग्रेजों के समय से चले आ रहे है भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की धारा 377 के उस प्रावधान को हटा दिया गया जिसके तहत एक ही जेंडर के दो लोगों को संबध बनाने की इजाजत नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 के तहत समलैंगिक संबंधों को वैध करार देते हुए कहा कि सेक्शुअल ओरियंटेशन प्राकृतिक होता है और लोगों का उसके ऊपर कोई नियंत्रण नहीं होता। यह एक अहम फैसला साबित हुआ। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय फैसले ने एलजीबीट कम्युनिटी को राहत की सांस दी। आज लोग एलजीबीट कम्युनिटी के हक को लेकर ज्यादा मुखर और साकारात्मक हो गये हैं। लोगों के मन से यह गलतफहमी भी हटी है कि एक लिंग के दो लोग आपसे में प्रेम नहीं कर सकते हैं।

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