UP Election 2022: पूर्वांचल में मोदी के लगातार दौरे क्या संदेश दे रहे है

ऐसा पहली बार हुआ है कि जब पीएम नरेंद्र मोदी 45 दिनों के अंदर छह दौरे सिर्फ पूर्वांचल में किए हो । वैसे तो पूर्वांचल के सभी जिले बीजेपी के लिए अहमियत रखते है लेकिन गोरखपुर जहां से यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आते है उनका संसदीय क्षेत्र भी रहा है दूसरा बनारस है जहां से पीएम नरेंद्र मोदी सांसद है वो भी दो बार इसी बनारस से जीते है ।

यूपी विधानसभा चुनाव 2021

यह बात सही है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव है तो पीएम मोदी का दौरा करना लाजमी है मगर डेढ़ महीने में 6 दौरे आखिर क्या दर्शाता है संदेश क्या देना चाहती है बीजेपी । क्या पूर्वांचल में बीजेपी कमजोर साबित हो रही है इसका जवाब आगे तलाशने की कोशिश करेंगे । पीएम मोदी काशी विश्वनाथ धाम कोरिडोर के उद्घाटन के लिए बनारस आए थे । उस पर राजनीतिक विश्लेषकों ने तरह तरह के अनुमान और समीकरण का गणित लगाना शुरू कर दिया ।

काशी विश्वनाथ की धरती पर आना यह साबित करता है कि बीजेपी अभी भी अपने हिंदुत्व के एजेंडे को साथ लेकर चलेगी । ऐसा नहीं है कि बीजेपी सिर्फ हिन्दू आस्था से जुड़े कामों में लगी है अभी दो दिन पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने बलरामपुर में सरयू नदी परिजोजना का उद्धघाटन किया जिससे तमाम किसानों को राहत मिली । मुद्दे से न भटकते हुए आपको बताते चले कि पूर्वांचल के अलावा कुछ और इलाकों में जैसे बुंदेलखंड, अवध, और पश्चिमी यूपी की राजनीति अहम रखती है ।

मोदी के दौरे और पूर्वांचल का गणित

बीजेपी जल्द से जल्द उत्तर प्रदेश में अपनी योजनाओं का बखान करना चाहती है क्योंकि आचार संहिता लगने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है इसलिए बीजेपी अभी भी उन तमाम योजनाओं का उद्घाटन , लोकार्पण खुद योगी आदित्यनाथ से नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी से करवा रही है मतलब साफ है कि अभी भी पीएम नरेंद्र मोदी का चेहरा यूपी की जनता के बीच नजर आयेगा । पिछले पांच सालों में योगी आदित्यनाथ भले ही एक छवि बनाकर उभरे हो लेकिन जो जादू जनता के बीच अभी भी मोदी का है वह योगी आदित्यनाथ का नहीं है तभी सबसे पहले 20 अक्तूबर को कुशीनगर हवाई अड्डे का लोकार्पण मोदी से कराया , उसके बाद 25 अक्तूबर को पूर्वांचल के नौ मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण किया । उसके बाद 16 नवम्बर को सुलतानपुर से लखनऊ गाजीपुर जोड़ने वाले 341 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस का उद्धघाटन किया ।

9600 करोड़ की परियोजना का लोकार्पण

7 दिसंबर को 9600 करोड़ की परियोजना का लोकार्पण किया । मतलब तो यही समझ रहा है कि पूर्वांचल में बीजेपी कमजोर दिख रही है और यह मोदी योगी के लिए नुकसान हो सकता है आपको एक बात याद दिला दे की जब 2018 में गोरखपुर में उपचुनाव हुए थे तो योगी आदित्यनाथ सीएम थे फिर भी बीजेपी सीट हार गई थी । अब थोड़ा गणित समझिए । पूर्वांचल में 26 जिले आते है । और साल 2017 मे जब चुनाव हुए तो 156 सीटों में बीजेपी 106 सीटें जीती थीं और जब 2019 में लोकसभा चुनाव हुए तो बीजेपी ने 30 मे से 21 सांसद चुने गए । राजनीति में आंकड़े और नतीजे बदलते रहते है यह सब जनता के मूड पर तय करता है

क्या पश्चिम की भरपाई पूर्वांचल से करेगी बीजेपी

जनता के बीच और मैदान पर क्या दिख रहा है इससे बहुत कुछ साफ नहीं होता है लेकिन सपा के चलते बैकफुट पर नजर आ रही है बीजेपी यह कहना ठीक भी होगा और नहीं भी । क्योंकि अखिलेश यादव के साथ छोटे दल बहुत है सुहेलदेव समाज पार्टी , महान दल, अपना दल ,जनवादी पार्टी , इसके बाद अटकलें ये भी आ रही है कि शिवपाल सिंह यादव उनके चाचा भी साथ आयेंगे । मतलब साफ है कि ऐसे गठबन्धन से मजबूती पूरी मिलेगी सपा को और चुनौती मिलेगी बीजेपी को ।

बीजेपी का मिशन 2022

हालांकि बीजेपी भी पुरजोर कोशिश कर रही है कि कैसे जातिगत समीकरण बनाया जाए । अपने सहयोगी दल से समझौता बनाने में जुटी है । सपा और बीजेपी दोनों जानती है कि पूर्वांचल में मुस्लिमो को संख्या पश्चिम से कम है ऐसे ने सपा बिना मुस्लिम कार्ड खेले दूसरे वर्गो पर अपनी पकड़ बनाएगी । सपा सोच रही है कि ब्राह्मण , राजभर , कुर्मी , पटेल ,यादव के बीच जनाधार बनाना आसान होगा ।

इसलिए मुस्लिम छवि से बाहर निकलने की जगत में लगी है । उधर बीजेपी है की धर्म की राजनीति और फ्री राशन की घुट्टी से जनता कितना भला करेगी । कुछ भी हो पीएम की सक्रियता यूपी में यह दर्शा रही है कि बीजेपी डरी हुई है जो चुनाव योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर लड़ना चाहिए था वह मोदी पर दांव लगा रही है आसान किसी के लिए नहीं होगा ।

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