Russo-Ukrainian War : रूस और यूक्रेन में जंग के मुहाने पर खड़ी महाशक्तियां

पिछले साल करीब 11 दिनों तक अज़रबैजान और आर्मेनिया के बीच जंग हुई थी जिसने दोनों देशों को भारी नुकसान हुआ था हजारों की संख्या में सैनिकों की मौत हुई । लेकिन अब साल 2022 में ऐसा लग रहा है कि दुनिया एक बड़ी जंग देखने के लिए टकटकी लगाए हुए है भले ही यह जंग रूस और यूक्रेन के बीच हो लेकिन इसमें दुनिया के तमाम बड़े बड़े मुल्कों की एंट्री जंग को और क्रूर कर सकती है ।

दरअसल क्रीमिया पर कब्जे और यूक्रेन को नाटो देशों में शामिल न होने देने के लिए चल रहा रूस और यूक्रेन के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है दोनों देशों के जंग के बीच चिंता तब बढ़ने लगी जब दुनिया का सुपर पॉवर मुल्क अमेरिका ने रूस को ललकार दिया है इसके साथ ही कनाडा, ब्रिटेन , जर्मनी , फ्रांस जैसे नौ देशों ने रूस को घेरने शुरू कर दिया है कुछ दिन पहले रूस ने यूक्रेन की सीमा पर पौने दो लाख सैनिकों की तैनाती कर दी है इसके साथ ही यूक्रेन में अपने दूतावास को भी खाली कराना शुरू कर दिया है रूसी सैनिक युक्रेन की सीमा से सटे बेलारूस पहुंच गए है । ब्रिटेन ने भी युक्रेन की मदद के लिए सैन्य सहायता पहुंचानी शुरू कर दी है ।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाईडन ने रूस को चेता दिया है कि अगर युक्रेन पर हमला हुआ तो रूस को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी । इसलिए अमेरिका ने युक्रेन के लिए 200 मिलियन डॉलर की सैन्य मदद देने का ऐलान भी कर दिया है ।

आखिर क्या है झगड़े की वजह

चलिए थोड़ा इतिहास के पन्ने खंगालते है बात है साल 1954 में सोवियत संघ के सर्वोच्च नेता निकिता खुष्चेव ने क्रीमिया को तोहफे के तौर पर युक्रेन को सौंप दिया था उस समय यूक्रेन सोवियत संघ का हिस्सा था । लेकिन साल 1991 में जब सोवियत संघ का विघटन हुआ तो युक्रेन रूस से अलग हो गया और क्रीमिया युक्रेन के पास चला गया । और फिर क्रीमिया रूस और यूक्रेन के बीच झगड़े की जड़ बन गया ।

रूस ने इस पर कब्जा कर लिया और यूक्रेन में अलगाववाद को बढ़ावा देने का आरोप रूस पर लगता रहा है लेकिन रूस है की आरोपों को गलत बताता रहा है । रूस नहीं चाहता की यूक्रेन नाटो में शामिल हो अगर यूक्रेन नाटो का हिस्सा बना तो रूस के लिए खतरा बन सकता है जिसके बाद अमेरिका का दखल बढ़ेगा ।

कौन देश किसके साथ

दुनिया में जब भी दो मुल्कों के बीच जंग होती है तो दुनिया के कई देश दो भागों में बंट जाते है और अपने अपने सहयोगी की सहायता करने में जुटने लगते है

रूस – अगर जंग हुई तो रूस के साथ चीन दोस्त बनकर उसका साथ देगा , ईरान , पाकिस्तान भी साथ आ सकते है

युक्रेन – अमेरिका , जर्मनी , फ्रांस , ब्रिटेन, कनाडा जैसे बड़े देश यूक्रेन के साथ मौजूद रहेंगे ।

दोनों के बीच तनातनी की बड़ी वजह

* साल 2014 में मलेशिया एयरलाइंस के एक विमान को पूर्वी यूक्रेन में गिराया गया था तब रूस पर आरोप लगे थे कि ये काम रूसी अलगाववादियों का है इसे रूसी मिसाइल से निशाना बनाया गया था ।

* पिछले कुछ दिनों पहले रूस ने क्रीमिया के प्रायद्वीप के पास यूक्रेन के तीन जहाजों पर हमला कर दिया और उसे कब्जे में लिया था रूस ने यह गलत किया क्योंकि साल 2003 में एक संधि के तहत जल सीमाएं बंटी होने के बावजूद जहाजों ने इसका उन्लंघन किया ।

* पिछले साल 14 जनवरी 2021 को युक्रेन की एक सरकारी वेबसाइट पर रूस ने साइबर हमला किया था.

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