UP Election 2022 : सपा कैसे बचाएगी इटावा का गढ़

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव है, और उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी सियासत पार्टी समाजवादी पार्टी (Political Party – SP) है, और पिछले 40 साल से उत्तर प्रदेश की राजनीति में इटावा और सैफई यादव परिवार की खास जगह रही है समाजवादी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का गढ् की फिजा में समाजवाद रचा और बसा रहा है लेकिन अब तस्वीर बहुत कुछ बदली है दरअसल मुलायम परिवार का गढ़ रहा इटावा आज रोमांचक चुनावी भिडंत की दहलीज पर खड़ा है 

सूबे को दो मुख्यमंत्री देने वाले इटावा मे समाजवादी पार्टी के सामने भाजपा कांटे की टक्कर देने के लिए खड़ी है करहल विधानसभा से अखिलेश यादव के उतरने से इटावा का चुनावी समीकरण और भी रोमांचित हो गया है फिर भी ऐसा लगता है कि भाजपा सपा के साम्राज्य को भेदने में सफल नहीं हो पाएगी । पहले भी आप देखें तो जब भाजपा की लहर थी तो शिवपाल सिंह यादव अपनी जसवन्तनगर की सीट बचाने में कामयाब रहे थे । 

इटावा, मैनपुरी, कन्नौज, में आज भी सपा का दबदबा है । साल 2017 से पहले भाजपा के लिए यहां से विधानसभा का रास्ता आसान नहीं रहा । फिर भी भाजपा ने सपा के इस किले में सेंध लगाई और और तीन में से दो सीटें कब्जे में ले ली थी। वो तीन सीटें इटावा सदर, भरथना और जसवंत नगर की है जिसमें इटावा सदर और भरथना में बीजेपी ने 2017 चुनाव में कब्जे में लिया और शिवपाल सिंह यादव अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे ।

फुट से कमजोर हुआ था कुनबा | Differences in Samajwadi Party

इतिहास ही बताता है कि भरथना में  वर्ष 1993 से 2002 तक सपा का कब्जा रहा है इसके बाद 2017 तक सपा, बसपा और कांग्रेस बारी बारी से जीतते रहे है इटावा सदर नहीं1993 से 2017 तक सपा के कब्जे में रहा । लेकिन पिछले चुनाव मे कुनबे में कलह की वजह से यह किला कमजोर हुआ जिसका फायदा बीजेपी को मिला । और वह इन दोनों सीटों पर काबिज हो गई ।

मुद्दा और जातियों में होती है जंग | Caste in Politics

मुलायम परिवार यादव जाति से वहां बहुत फर्क पड़ा है ऐसा नहीं है कि महंगाई, अन्ना पशु, औधोगिक , पिछड़ापन और टूटी सड़कें जैसे मुद्दे है और लोग इन पर बात भी करते है लेकिन इस पूरे खीत्ते में जातीय समीकरण बहुत है और यहां की राजनीति जातीय समीकरण के इर्द गिर्द घूमती है । अब देखना यह होगा कि 2022 की राजनीति किस करवट बैठती है ।


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