UP Election 2022 : बीजेपी के बागी नेता सपा के लिए मुसीबत तो नहीं बनेंगे

कभी कभी क्रिकेट में हम देखते है न की कैसे एक के बाद एक बल्लेबाज आउट होते चले जाते है और परिस्थिति तू चल मैं आया की तरह बन जाती है ठीक ऐसा ही कुछ पिछले दिनों यूपी की सियासत में देखने को मिला । जब बीजेपी के बागी नेता एक के बाद एक पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम रहे थे ।

बीजेपी के बागी नेता सपा के लिए मुसीबत तो नहीं बनेंगे

स्वामी प्रसाद मौर्य से लेकर धर्म सिंह सैनी जैसे बड़े नेता सहित तीन मंत्री और आठ विधायक का छोड़कर जाना बीजेपी के लिए तो मुसीबत बन ही गई है साथ ही समाजवादी पार्टी के लिए भी मुसीबत पैदा हो गई है आप इस पूरे मामले में कुछ भी सोच सकते है कि इससे समाजवादी पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में फायदा होगा । और बीजेपी को नुकसान , लेकिन यहां समीकरण कुछ उल्टा है जिसे समझना जरूरी है । सवाल यही है कि जो मंत्री और विधायक बीजेपी छोड़कर सपा में आए है अखिलेश यादव उन्हे जहां किसकी जगह फिट करेंगे ।

UP Election 2022

यह अखिलेश यादव के लिए चुनौती से कम नहीं है क्योंकि सबको अपने मन मुताबिक सीट चाहिए । तभी तो बीजेपी छोड़कर आए है सबकी अपनी चिंता और परेशानी है मसलन खबर यह भी है कि बागी विधायको की संख्या में और इजाफा होगा । जो समाजवादी पार्टी के लिए टेडी खीर साबित होगी.

क्या है स्वामी प्रसाद मौर्य की मुश्किल

ओबीसी का बड़ा चेहरा माने जाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य को जैसे ही सपा मुखिया अखिलेश यादव ने लाल टोपी पहनाकर सपा में शामिल होने का प्रमाण दे दिया साथ ही स्वामी प्रसाद मौर्य संकेत दे दिया कि बीजेपी से कोई वास्ता नहीं है । वैसे स्वामी प्रसाद मौर्य कुशीनगर के पडरौना सीट से विधायक है लेकिन समस्या उनकी नहीं उनके बेटे की है उत्कृष्ट रायबरेली की ऊंचाहार से विधान सभा चुनाव लडा था वो हार गए थे उत्कृष्ट को सपा नेता मनोज पांडे ने हराया था ।

बस समस्या यही है कि जब मनोज पांडे पिछली बार जीते थे तो सपा उनको ही टिकट देगी ना की उत्कृष्ट को , क्योंकि वो हारे प्रत्याशी है स्वामी प्रसाद मौर्य इसी गणित से सपा में आए है कि उनके बेटे को टिकट मिलेगा । लेकिन मनोज पांडे ने साफ कर दिया है कि वह ऊंचाहार से ही चुनाव लडेंगे ।

किस सीट के लिए धर्म संकट में है धर्म सिंह सैनी

धर्म सिंह सैनी एक बड़ा नाम है साल 2017 में जब चुनाव हुए तो सैनी ने सहारनपुर की नकुड विधानसभा सीट से चुनाव लडा था और भारी मात्रा में 94 हजार मतों से जीत दर्ज की थी । यही धर्म सिंह सैनी पहले बसपा में थे फिर भाजपा और अब सपा का दामन थाम लिया । वैसे धर्म सिंह सैनी भी ओबीसी का बड़ा चेहरा है । अब सैनी का धर्म संकट क्या है वह भी समझ लीजिए ।

दरअसल समाजवादी पार्टी धर्म सिंह सैनी को लेकर पशोपेश में है सहारनपुर के बड़े नेता इमरान मसूद जिन्होंने पिछले कुछ दिनों पहले कांग्रेस का साथ छोड़कर सपा मे शामिल हुए है। इसी सीट से धर्म सिंह सैनी ने 2012 और 2017 चुनाव में इमरान मसूद को हराया था । क्योंकि 2017 मे अंतर सिर्फ चार हजार वोट का था इसलिए इमरान मसूद की छवि पहले से अब निखरी है ऐसे में अखिलेश यादव नकुड़ सीट से किसे टिकट देंगे धर्म सिंह सैनी या फिर इमरान मसूद को यह कुछ दिनों में पता लग जाएगा ।

दारा सिंह का दावा किस सीट पर होगा

ये वही दारा सिंह चौहान है जो साल 2000 से 2006 तक समाजवादी पार्टी से राज्यसभा के सांसद रह चुके है और बीजेपी से कैबिनेट मंत्री थे साल 2009 मे बसपा के टिकट पर घोसी से जीतकर संसद पहुंचे थे लेकिन 2014 मे हार गए थे । उन्हे बीजेपी के हरिनारायण ने शिकस्त दी थी । फिर साल 2017 में बीजेपी के टिकट पर मधुबन सीट से जीत गए तब उन्होंने कांग्रेस को मात दी थी ।

ऐसा प्रतीत हो रहा है दारा सिंह सीट बदलना चाहते है इसलिए वह उसी पार्टी के साथ जाएंगे जो उनको समझेगी । सवाल यह भी है कि जो बागी नेता सपा में गए है क्या अखिलेश सबकी मुराद पूरी करेंगे या फिर अपने पुराने नेताओ को नाराज करके इन्हें टिकट देंगे ।

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