Ghulam Nabi Azad : क्या गुलाम नबी कांग्रेस से आजाद होकर अलग पार्टी बनाएंगे

एक वक्त था जब देश की पहली और सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस में शीर्ष से लेकर नीचे तक हर कार्यकर्ता पार्टी के लिए खुद को समर्पित कर देता था और आजादी के बाद कांग्रेस पार्टी ने समूचे देश में एक छत्र राज किया । मगर तब की कांग्रेस और आज की कांग्रेस पार्टी में जमीन आसमान का फर्क है । आज पार्टी के अंदर नेता बगावती हो गए है या फिर उन्हे कांग्रेस की नीति समझ नहीं आ रही है क्योंकि बीजेपी के आने के बाद कांग्रेस का जो बुरा हाल हुआ है इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था ।

नाराज़गी का कारण कौन प्रदेश अध्यक्ष या पार्टी का नेतृत्व

खैर मुद्दे को न भटकाते हुए शीर्षक पर लिखे मुद्दे पर बात करते है । दरअसल कभी कांग्रेस पार्टी के नेता गुलाम नबी आजाद खुद की अलग पार्टी बनाने की चर्चा की वजह से सुखियों में है दरअसल बीते कई दिनों से जम्मू कश्मीर प्रदेश कांग्रेस में उथल पुथल मची हुई है कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा देकर मौजूदा प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ खुलकर बगावत शुरू कर दी है । मसलन जम्मू कश्मीर प्रदेश कांग्रेस के जिन नेताओं ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया है । उन सभी को पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद का करीबी समझा जाता है ऐसे में कयास लगने शुरू हो गए है कि हो सकता है आने वाले समय में गुलाम नबी आजाद खुद की नई पार्टी बनाए ।

यह बात सच है कि आगामी पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व उलझा हुआ है साथ नेतृत्व पर बीच बीच में खड़े होते सवालों ने पार्टी को और पशोपेश में रखा है । उधर देश का सबसे संवेदनशील राज्य जम्मू कश्मीर में भी कुछ ठीक नहीं चल रहा है ।

लब्बोलुआब बात यह है कि बीते दिनों जम्मू कश्मीर प्रदेश कांग्रेस समिति के कई नेताओं ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है कौन कौन शामिल है वो भी जान लीजिए । पूर्व मंत्री जीएम सोरोरी , विकार रसूल वानी , डॉक्टर मनोहर लाल शर्मा , जुगुल किशोर , गुलाम नबी मोंगा , नरेश गुप्ता , सुभाष गुप्ता और अमीन बट्ट शामिल है ये सभी विधायक रह चुके है हैरानी वाली बात यह भी है कि इनके आलावा पार्टी के दूसरे लोगों ने भी इस्तीफे दिए है और आलाकमान तक पहुंच भी गए है ।

आरोप यह भी है कि जम्मू कश्मीर प्रदेश कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व के चलते पिछले कुछ वर्षो में जो नुकसान हुआ है । उसकी भरपाई आसान नहीं है । समस्या यह भी है कि अगर आने वाले समय में चुनाव होते है तो कांग्रेस पार्टी का मुकाबला नेशनल कांफ्रेंस, बीजेपी और पीडीपी से होगा जो मौजूदा हालात को देखते हुए बिल्कुल आसान नहीं होगा ।

गुलाम नबी और प्रदेश अध्यक्ष मीर की सोच

गुलाम नबी आजाद पार्टी के भरोसेमंद नेताओं की सूची में आते है पार्टी के प्रति उनकी सोच हमेशा ऐसी रही है कि पार्टी में उनका योगदान पूरा हो । आर्टिकल 370 मामले में गुलाम नबी आजाद क्या सोचते है उसको भी जानिए । आजाद का कहना है कि मेरी गतिविधियां कुछ खास नहीं चल रही है बीते दो वर्षो से मेरा राफ्ता कट सा गया था 370 पर गुलाम नबी आजाद की वही सोच है जो कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व का है ।

हालाकि इस बीच वह इस बात को खारिज कर चुके है कि वह कोई नई पार्टी भी बना रहे है । जिन नेताओं ने इस्तीफा दिया है ये उनका अपना कारण है उधर जम्मू कश्मीर प्रदेश अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर का मानना है कि जिन नेताओं ने आलाकमान को इस्तीफा दिया है उन्हे हमसे एक बार आकर बात करनी चाहिए । वो पिछले कुछ सालों से पार्टी के कार्यक्रम में भी शामिल नहीं हो रहे थे। एक बात तो तय है कि प्रदेश दो खेमों में बंट चुका है एक खेमा अध्यक्ष का है तो दूसरा आजाद का । और गुलाम नबी आजाद बड़े नेता है तो उनका पलडा भारी है । उधर आलाकमान का झुकाव गुलाम नबी आजाद की तरफ नहीं बल्कि दूसरी तरफ है मतलब साफ है कि आने वाले दिनों में बहुत कुछ बदलता नजर आएगा ।

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