Chhath Puja Celebration : जानें, महापर्व छठ से जुड़ी अहम बातें

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी यानी दीवाली के ठीक 6 दिन बाद महापर्व छठ पूरे भारतवर्ष में उत्साह, उमंग और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह वास्तव में सूर्य की उपासना का एक पावन पर्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सूर्यदेव की आराधना करने से व्रती (परवैतिन) को सुख, शांति, सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है और व्रती की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। छठ सनातन धर्म के प्रमुख त्योहारों में एक है। आइये जानते हैं महापर्व छठ सी जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।

चार दिनों का होता है छठ पर्व

छठ का प्रथम दिन नहाय खाय के रूप में मनाया जाता है। इस दिन पूरे घर की साफ सफाई होती है। इसके पश्चात छठ के व्रती स्नान कर सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करती हैं। घर के सभी सदस्य व्रती के भोजन करने के बाद ही भोजन ग्रहण करते हैं। भोजन के रूप में कद्दू-चने की दाल और चावल ग्रहण किया जाता है।

छठ का दूसरा दिन को खरना कहा जाता है। खरना का प्रसाद लेने के लिए आस-पास के सभी लोगों को बुलावा दिया जाता है। प्रसाद में नमक या चीनी का उपयोग नहीं किया जाता है। इस दौरान पूरे घर की पावनता का विशेष ध्यान रखा जाता है।

छठ का तीसरा दिन संध्या अर्घ्य के रूप में बनाया जाता है। इस दिन छठ के प्रसाद के रूप में ठेकुआ, अरवा चावल के लड्डू बनते हैं। शाम को व्रती के साथ परिवार व आस पड़ोस के लोग सूर्य को अर्घ्य देने घाट की ओर निकल पड़ते हैं। यह दृश्य हर श्रद्धालु के लिए यादगार और आकर्षक होता है।

छठ के चौथा दिन सुबह चढ़ते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य दे कर सभी व्रती तथा श्रद्धालु घर वापस आते हैं। और इसी तरह छठ की समाप्ति हो जाती है।

भगवान राम और देवी सीता ने भी किया था ये व्रत

कहा जाता है कि दीपावली के छठे दिन भगवान राम ने सीता संग अपने कुल देवता सूर्य की पूजा सरयू नदी में की थी। उन्होंने षष्ठी तिथि का व्रत रखा और सरयू नदी में डूबते सूर्य को फल, मिष्टान्न एवं अन्य वस्तुओं के साथ अर्घ्य प्रदान किया। सप्तमी तिथि को भगवान राम ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त किया। और फिर राजकाज संभालना शुरू किया। इसके बाद से आम जन भी सूर्य षष्ठी का पर्व मनाने लगे।

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