SIM FULL FORM : क्या है सिम का फुल फॉर्म, कब हुआ आविष्कार जानिए पूरी जानकारी

 

सिम फुल फॉर्म : एक समय था जब मोबाइल का इस्तेमाल चुनिंदा लोग ही करते थे।  क्योंकि तब महंगा लगता था आज मोबाइल का इस्तेमाल सभी करते है शहरों और कस्बों में तो इसकी संख्या बहुत अधिक है अब तो ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल के इस्तेमाल का चलन बढ़ा है युवा वर्ग अधिक संख्या में मोबाइल का उपयोग कर रहे है। लेकिन दोस्तों मोबाइल बिना सिम कार्ड के अधूरा है इसलिए मोबाइल में सिम का उपयोग बहुत जरूरी है कई लोग सिम का उपयोग करते है दरअसल वो आपका नंबर होता है दोस्तों कई लोग सिम क्या होता है इसका पूरा नाम क्या है इसका आविष्कार किसने किया था बहुत लोगों को नहीं पता है आज हम अपने आर्टिकल में सिम के बारे में बताएंगे आप आर्टिकल को अंत तक पढिए ।

सिम कार्ड का फुल फॉर्म क्या है

पहले समझ लेते है सिम का फुल फॉर्म क्या है दोस्तों सिम का पूरा नाम  subscriber Identification Module है सिम कार्ड ऐसा कार्ड है जिसका उपयोग हम  मोबाइल फोन या स्मार्ट फोन पर करते है इसका प्रमुख काम यह है आपके मोबाइल फोन पर आपके नंबर द्वारा आपको सेवाएं प्रदान कर सकें । मतलब मोबाइल नेटवर्क के साथ कनेक्ट कर सकें। सिम कार्ड का आविष्कार 1991 में Munich smart card maker Gisecke and Devirent  के द्वारा किया गया था। आपक बता दें कि इस कम्पनी ने पहले साल में 300 वायरलेस सिम बेचे थे।

कितने प्रकार के होते है सिम

सिम सामान्यता दो प्रकार के होते है एक पोस्टपेड सिम दूसरा प्रीपेड सिम । सभी टेलीकॉम कम्पनी इन्हीं दो सिम का उपयोग करती है।  आइए समझते है दोनों सिम में क्या अंतर है

Pripaid sim – प्रीपेड सिम वह सिम होता है जिसमे आपको  सेवाएं लेने के लिए पहले कम्पनी को भुगतान करना पड़ता है फिर आपको सर्विस मिलती है ।आप जिन सेवाओं के लिए भुगतान करेंगे जैसे कॉलिंग, मैसेजिंग , डेटा आदि इसके लिए पहले ऑनलाइन माध्यम से रिचार्ज कराना पड़ेगा फिर आपको सुविधा मिलेगी। यह आपके उपर है कि आप कितने महीने का भुगतान करके सेवाएं लेना चाहते है । जिसे हम आम भाषा में रिचार्ज कहते है

Post paid sim – इस तरह के सिम में ग्राहक पहले सर्विस का उपयोग करते है फिर बाद में भुगतान करते है । यहां पर आप जितनी सर्विस उपयोग करेंगे आपको उतने पैसे देने होंगे। पोस्ट पेड सिम में ग्राहक को उसकी सेवा के अनुसार ही सर्विस दी जाती है । जिसमें कॉलिंग , मैसेजिंग और डेटा की लिमिट तय होती है आप एक महीने में जितनी सेवाएं लेंगे उतने का भुगतान करना होगा । पैसे आपको महीने के अंत में जमा करने होंगे। अगर आप पैसे देने से मना करते है तो सर्विस प्रोवाइडर आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकता है । 

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