Misuse of Internet by Youngsters : इंटरनेट की जद में कैसे आई किशोर पीढ़ी

एक वक्त था जब किशोर अवस्था में हम लोगों के पास मनोरंजन के कुछ चुनिंदा जुगाड़ू चीजें होती थी । घर में मौजूद उपस्थित चीजों का इस्तेमाल कर उन्हे मनोरंजन का साधन बना लेते थे । आज जब तकनीक और Internet ने पूरी तरह से मानवजाति की हर पीढ़ी को अपनी गिरफ्त में ले लिया है तो उससे भला किशोर पीढ़ी कैसे अछूत हो सकती है ।

कभी कभी जब Youngsters के हाथ में Mobile और Laptop जैसे अन्य तकनीकी उपकरण होते है, तो ऐसा लगता है वो हमसे ज्यादा जानकारी रखते है और उसे अच्छी तरह समझते है खैर इससे परे भी कुछ बातें है जिनमें किशोरों ने तकनीक से जुगलबन्दी कर खौफनाक वारदातों को अंजाम दिया । सवाल भी यही है की क्या इसकी जड़ में ऑनलाइन दुनिया का असर काम कर रहा है  आपने इसी महीने एक वाक्य सुना और देखा होगा । बुली बाई एप की घटना । कई बार यह भी देखा गया है कि किशोरों का एक ग्रुप होता है और उस ग्रुप का लीडर कौन होगा ।

इसको लेकर ना समझ किशोर एक दूसरे के दोस्त से कब दुश्मन बन जाए पता नहीं लगता। आज जिस तेजी से किशोरों का मस्ति्क और उनके काम करने , रहने और कुछ अन्य तरीके बदल रहे है मतलब किशोरों की बदलती दुनिया को लेकर चिंता में डालने वाली है ।

It has also been seen in today's time, that even if teenagers do any incident, they do not even regret that incident. How are teenagers doing all this? At an early age, when teenagers used to engage in entertainment and future goals, today the Internet has really changed their world.

बच्चों और पैरेंट्स के बीच बढ़ती दूरियां | Growing Distance Between Children & Parents

छोटे – बड़े कितने शहरों ,कस्बे और गांवों को देख लीजिए । कुछ प्रतिशत अभिभावक ही ऐसे होंगे जो अपने बच्चों पर नजर रखते है और उन्हें सही दिशा और गाइड करते है पहले भी हम देखते थे कि बच्चे अगर कुछ अपने अभिभावक से किसी प्रश्न का उत्तर चाहते है या किसी समस्या का समाधान चाहते है तो शायद ही बच्चो को मिलता हो , आज भी ऐसे हालात दिख रहे है समाज में कि बच्चे समाधान के लिए अपने अभिवावकों के पास नहीं जाते और समाधान तलाशने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे है इंटरनेट पर मिले उनके जवाब कितने सही है कितने पहलू है उनके लिए ये सब महत्व नहीं रखते । इसमें कोई दोहराए नहीं है कि भारत ही नहीं बल्कि कई विदेशी मुल्कों में भी किशोरों से जुड़ी घटनाएं चिंतिंत कर रही है किशोर पीढ़ी अब अधिक खतरनाक, हिंसक, और तकनीक को समझकर अपराध की दुनिया में कदम रखने से नहीं कतरा रही ।

बदल रही किशोरों सोच | Teenager Thinking

तकनीक और इंटरनेट की दुनिया में कौन नहीं  बदल रहा या फिर बदलना नहीं चाहता । यह भी सही है समय के साथ परिवर्तन ही मनुष्य की सही दिशा दिखा देता है कुम्हार जैसे कच्ची मिट्टी को लेकर उसे किसी भी आकृति में परिवर्तित करने का माद्दा रखता है उसी तरह हमारे बच्चे होते है बिल्कुल उसी कच्ची मिट्टी की तरह अभिवावकों की जिम्मेदारी बनती है कि उन्हें सही आकार और सही दिशा में परिवर्तित किया जाए ।

अगर आप देखें तो ऑनलाइन मंचो पर किशोरों का वैसा ही समाज होता है जैसे आज वास्तविक दुनिया में होता है और इसने दबाव भी होता है आज किशोर की समस्या यही है कि तकनीक और इंटरनेट को उसने अपनी वास्तविक दुनिया मान ली है उन्हे अपनी समस्या का समाधान बिना किसी नियम व शर्तो के मिल जाते है । 

क्यों नहीं बताया सही  – गलत का फर्क | Uses of Internet for Students

आज की किशोर पीढ़ी जो कर रही है उसके जिम्मेदार कोई और नहीं हम है हमने बच्चों को तकनीक और इंटरनेट तो उपलब्ध करा दिया लेकिन उसका सही इस्तेमाल क्यों नहीं बताया, या फिर हमने यह समझ लिया कि आज कल के बच्चे तो होशियार है इन्हे भला बताने की क्या जरूरत है यह बात भी सच है कि आज सोशल मीडिया ने कई किशोरों को शोहरत भी दिलाई है उनका भविष्य भी संवारा है लेकिन सब ऐसे नहीं होते ।

गलत दोस्त , गलत सलाह , और सोशल मीडिया पर मौजूद गलत कंटेंट उन्हे दिशा को भटकाने में अहम योगदान रख रहा है । किशोरों को बचाना होगा । नहीं तो परिणाम गलत दिखाई देंगे ।

Wrong friends, wrong advice, and wrong content on social media are contributing significantly in diverting their direction. The teenagers have to be saved. Otherwise the result will be wrong.

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