UCC : क्या है समान नागरिक संहिता? यह भारत के लिये क्यों जरूरी है?

Uniform Civil Code : केंद्र में जब से नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की सरकार बनी तब से यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) की चर्चा ने जोर पकड़ लिया। दरसल भाजपा ने खुद के घोषणा पत्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड का जिक्र किया था। जिस रौ से भाजपा ने घोषणा पत्र के मुख्य मुद्दों पर जैसे कि राम मंदिर, धारा 370 पर ठोस कदम उठाया और संकल्प पूरा किया उससे यही प्रतीत होता है कि बहुत जल्द मोदी सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड को भी लेकर आयेगी।

क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड?

यूनिफॉर्म सिविल कोड का मतलब है हर एक भारतवासी के लिए एक जैसा कानून। भले ही वह शख्स किसी धर्म, संप्रदाय का हो। दरसल, हिंदुस्तान में शादी, तलाक, जमीन-जायदाद और विरासत से जुड़े अधिकार के लिए विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग कानून हैं। जिसे पर्सनल लॉ कहते हैं। गौरतलब है कि फिलहाल मुस्लिम, ईसाई और पारसी समुदाय का ही सिर्फ पर्सनल लॉ है। जबकि हिन्दू सिविल लॉ के तहत हिन्दू, सिख, जैन और बौद्ध आते हैं। यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड का अर्थ एक निष्पक्ष और धर्मनिरपेक्ष कानून है, जिसका किसी भी धर्म-पंथ-संप्रदाय से लेना देना नहीं है।

यह भारत के लिये क्यों जरूरी है?

भारत विविधता में एकता का प्रतीक है। भारत ने ही विश्व को ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (the world is one family) का पाठ पढ़ाया है। यहाँ विभिन्न धर्म और मान्यता के अनुयायी फलते फुलते रहे हैं। इसलिए अगर हर तबके को साथ लेकर चलना है तो यूनियन सिविल कोड का आना जरूरी है। वैसे भी विभिन्न धर्मों के विभिन्न कानून से न्यायपालिका पर दबाब पड़ता है। कॉमन सिविल कोड आ जाने से इस मुश्किल से छुटकारा मिल जायेगा और न्यायालयों में वर्षों से लंबित पड़े मामलों के निपटारे समय रहते हो जायेंगे। सभी के लिए कानून में एकसमानता से एकता को बढ़ावा मिलेगा और नतीजतन जहां हर नागरिक समान हो, उस देश में चौगुनी तरक्की होती है। साथ ही साथ मुस्लिम महिलाओं की स्थिति इस कानून के आने के बाद बेहतर होगी। और सबसे अहम बात यह है कि इस कानून के बाद तुष्टिकरण की राजनीति पर लगाम लगेगा।

कई देशों में आ चुका है यह कानूनी

भारत में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर सियासी दलों में तू तू मैं मैं होते रहती है। कोई इसे ‘मुस्लिम विरोधी’ कानून बताता है तो किसी का कहना है कि यह कानून ‘भारत की अस्मिता’ के लिए जरूरी है। जहाँ भारत में यूनिफॉर्म सिविल कोड की स्थिति असंभावित है वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया, तुर्की, इंडोनेशिया, सूडान और इजिप्ट जैसे कई देश में यह लागू हो चुका है।

इस कानून का विरोध क्यों हो रहा है?

एक बड़ा तबका है जो शुरुआत से ही यूनिफॉर्म सिविल कोड का खुलकर विरोध कर रहा है। विरोधियों के तीन मुख्य तर्क हैं जिन्हें हमें जान लेना चाहिए।

पहला तर्क – यह कानून सभी धर्मों पर हिन्दू कानून को लागू करने जैसा है।

दूसरा तर्क – यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25, जो किसी भी धर्म को मानने और प्रचार की स्वतंत्रता को संरक्षित करता है व भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 में निहित समानता की अवधारणा के विरुद्ध है।

तीसरा तर्क – भारत जैसे सेक्युलर देश में पर्सनल लॉ में दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए। इस कानून से सेकुलरिज्म खतरे में आ जायेगा।

क्या मोदी 2022 में लायेंगे UCC?

2021 खत्म होने वाला है। 2022 में कई सारे राज्यों में चुनाव हैं। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड कब तक आयेगा? क्या भाजपा राजनीति लाभ उठाने के लिए यह कानून 2022 में लायेगी या उसके कुछ और मनसूबे हैं?

जानकारों का कहना है कि मोदी जी बस 2022 का इंतजार कर रहे हैं यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने के लिए। क्योंकि यह कानून हिंदूत्व का एक ब्रह्मास्त्र है। अगर यूनिफॉर्म सिविल कोड आने में विलंब होता है तो मोदी की छवि कहीं ना कहीं धूमिल होगी। जब से प्रधानमंत्री ने कृषि कानूनों को वापस लिया है तब एक उनके समर्थक उनसे नाराज हैं। समर्थक जानते हैं कि कानून वापसी का फैसला मोदी जी ने दूरगामी परिणामों के लिए लिया है। इसलिए 2022 में हर हाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होना चाहिए ताकि मोदी जी दोबारा फ्रंट फुट पर आ कर छक्का जड़ दें।

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