जानिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन क्या है? किसानों को क्या है फायदा

Rashtriya Gokul Mission गोजातीय प्रजनन और डेयरी विकास (एनपीबीबीडी) के राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत स्वदेशी गोजातीय नस्लों के संरक्षण और विकास के लिए 2014 में 'राष्ट्रीय गोकुल मिशन' शुरू किया गया था।

मिशन के प्रमुख उद्देश्य

देशी नस्लों का विकास और संरक्षण करना।
देशी मवेशियों की नस्लों के लिए नस्ल सुधार कार्यक्रम शुरू करना ताकि आनुवंशिक संरचना में सुधार और स्टॉक में वृद्धि हो सके।
दुग्ध उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि करना।
गिर, साहीवाल, राठी, देवनी, थारपारकर, लाल सिंधी जैसी कुलीन देशी नस्लों का उपयोग करके गैर-वर्णित मवेशियों को अपग्रेड करना।
प्राकृतिक सेवा के लिए रोग मुक्त उच्च आनुवंशिक योग्यता वाले सांडों को वितरित करना।

इस योजना के लाभ के लिए ये होना जरूरी

इस योजना का लाभ प्राप्त करनें के लिए आवेदक को भारत का मूल निवासी होना आवश्यक है ।
आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक होना आवश्यक है।
इस स्कीम के अंतर्गत सिर्फ छोटे किसान और पशुपालक ही आवेदन कर सकते है।
सरकारी पेंशन पाने वाले पशुपालको या किसानो को इस योजना के लिए पात्र नही माना जायेगा।

किसान पशुपालन में अधिक से अधिक देशी नस्लों को तरजीह दें। इसके लिए पशुपालन और डेयरी विभाग हर साल पहले, दूसरे और तीसरे स्थान के लिए गोपाल रत्न और कामधेनु पुरस्कार दिया जाता है। ये कामधेनु पुरस्कार गोशालाओं और सर्वोत्तम प्रबंधित ब्रीडर्स सोसायटी को दिया जाता है। इस मिशन के तहत 2017-18 से अब तक 22 गोपाल रत्न और 21 कामधेनु पुरस्कार दिए जा चुके है।

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