साहित्य: पढ़िए युवा कवि ‘आदर्श आहिल’ की कविता – क्षमता

“क्षमता”

मार काट के नारे लग रहे थे
नारे लगाने वालों का चेहरा पोता हुआ था
उन्हें रोक पाना मुश्किल था

इंसानियत लहूलुहान थी
संवेदनाओं के चिथड़े उड़े हुए थे

नफरत ने वातावरण का तापमान बढ़ा दिया था

तभी पुलिस की गाड़ी आ धमकी
सायरन सुनकर सभी भागने लगे
पर मैं वहीं खड़ा रहा

गाड़ी से उतर कर
एक पुलिस अफसर मेरे सामने आया
और उसने मुझसे सवाल पूछा
कि हिंसा करने वाले लोग कौन थे?

मैंने कहा –
‘हिंसा करने वाले लोग कवि नहीं थे’!

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