साहित्य : आज पढ़िये ‘आदर्श आहिल’ की कविता – सुपरमैन

सुपरमैन

जब जब मैं अपनी तारीफ़ में
किसी को बताता हूँ
कि मैं एक सामान्य लड़का हूँ
तो उस वक़्त मेरी आत्मा मुझसे सवाल करती है

पूछती है कि क्यों मैंने किसी को कहा
कि मैं एक सामान्य लड़का हूँ

खुद को सामान्य बता कर
मैंने उस बच्चे को मार डाला
जो अपनी कॉपी के पीछे
बनाता था दुनिया की तस्वीर

और खुद को समझता था उसका रक्षक।

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