Third Wave :तीसरी लहर पर तीन तस्वीरें फिर इतिहास लिखेंगी

करोना वायरस की दो लहर पहले ही तबाही के मंजर से देश को रूबरू करा चुकी है अब करोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन जिस तेजी के साथ पैर पसार रहा है इसमें कोई शक नहीं की करोना की तीसरी लहर फिर से तांडव करने के लिए आपके सामने तैयार है पिछली दो दफे करोना ने जो प्रकोप मचाया था उससे दुनिया अभी उभरी नहीं है अगर भारत के लिहाज से बात करें तो देश का कोई भी राज्य ऐसा नहीं होगा जो करोना कि चपेट में ना आया हो । अपनो की टूटती सांसों को देखते हुए ना जाने कितने परिवार गवाह बन गए । उनके उनके लिए तो कभी न भूलने वाला सबक है । जिसके पास कुछ न था वह तो दुनिया से रुखसत हो गया लेकिन जो पूरी तरह से सक्षम में वह भी दर दर भटकते रहे और अपनों को तड़पते बिलखते मरते देखते रहे । आज हम आपको उन तीन दृश्यों के बारे में बताएंगे जो इससे पहले भी देश ने दो बार देखें है और इतिहास ने बड़ी ही मासूमियत तरीके से अपने पन्नों में दर्ज कर लिया लेकिन अब ऐसा लगता है कि इतिहास तीसरी बार फिर से उसी मंजर को लिखने के लिए तैयार है ।

मजदूरों का पलायन

” वक्त का ये परिंदा रुका है कहां, मै जो पागल था जो इसको बुलाता रहा, चार पैसे कमाने मै आया शहर , गांव मेरा मुझे याद आता रहा । शायद कुछ इसी गाने को अपनी जुबां पर गुनगुनाते हुए मजदूरों का पलायन आपको आने वाले समय में फिर से दिख सकता है । सैकड़ों किलोमीटर अपने घर से दूर हजारों की संख्या में मजदूर अपने परिवार के साथ सड़कों पर पैदल चलते या फिर बस ट्रेन पर पलायन की तस्वीर को इतिहास फिर से अपने पन्नों पर दर्ज करने के लिए मजबूर हो जाए ।

आपको तो याद ही होगा जब करोना वायरस ने पहली बार दस्तक दी थी तो कैसे सड़कों पर मजदूरों के पलायन का हुजूम देखने को मिला था । तस्वीरें देखकर ना जाने कितनों की आंखे नम हो गई थी घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर पेट में अन्न का दाना भी नहीं और अपनी जान हथेली पर लेकर पैदल ही चल दिया । कुछ ऐसा ही हाल दूसरी लहर के दौरान भी देखने को मिला था । अब ओमिक्रोन से चुनौती देने को तैयार है ।

शमशान घाट में मौत की बारात

जन्म हुआ है तो मृत्यु निश्चित है कहते है मौत अपना रास्ता नहीं बदलती वह अपने तय समय पर किसी भी रूप में आ सकती है लेकिन देश की भ्रष्टचारी , अस्पतालों की मनमानी , लूट ,घसोट ने कितनों की जानें तो लगता है तय समय से पहले ही ले लीं । शायद यमराज भी सकते में पड़ गए होंगे कि हमारी किताब में समय भी नहीं पूरा हुआ और ये जनाब हमारे पास आ गए ।

हालात इतने बत्त से बत्तर हो गए थे कि शमशान घाट में शवों को जलाने के लिए लाइन लगी हुई थी टोकन लेना पड़ रहा था एक के बाद एक भ्रष्टाचार की शिकार हुई लाशें धू धुकर जल रहीं थी मानों होली जल रही हो । शायद ही ऐसा मंजर इससे पहले किसी ने देखा हो । सांस देने लिए करोना मरीज से हर सेकेण्ड सांस की खरीद परोख्त चल रही है । जो जिसको जितना लूट सकता था उसने लूटा । कुछ चुनिंदा लोगों को छोड़ दे तो मानवता तार तार हो गई थी । करोना वायरस से तो कम भ्रष्टाचार ने ना जाने कितनी जानें ले लीं ।

सड़को पर सन्नाटा

अदृश्य वायरस ने जब देश को चारो कोनो से जकड़ लिया और करोना मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ साथ ही मौतों का आंकड़ा देख सरकार परेशानी में आ गई । तब प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए करोना की पहली लहर के दौरान 21 दिन का लॉकडाउन लगा दिया । जिसमें दो चीजें देखने को मिली ।

पहली जो हमने ऊपर बात की मजदूरों का पलायन और दूसरी गली नुक्कड़ और कुछ सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। लोग घर में दुब्बक कर रह गए। सड़कों पर सन्नाटे को चीरती हुई हवाएं ही सिर्फ इस बात का अहसास करा रही थी कि जीवन कितना कीमती है । स्कूल , कॉलेज, सरकारी दफ्तर , सिनेमा, मॉल, फैक्ट्री , कारखाने, खेल सब बन्द हो गए थे । सिर्फ जरूरी सामान ही उपलब्ध कराया जा रहा था उस समय सिर्फ जीवन बचाना चाहती थी । अर्थव्यवस्था तो चरमरा ही गई थी लेकिन सरकार ने इसकी तनिक भी परवाह न करते हुए लोगों की जान बचाना मुनासिब समझा । इसके बाद छोटे छोटे अंतराल के लॉकडाउन लगते रहे । और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा । शायद अब फिर उसी मंजर के इतिहास को लिखने की बारी फिर से आहट दे रही है ।

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