Omicron: दुनिया अब महामारी की गिरफ्त में होगी

दुनिया ने वैसे तो महामारी के लिए मंजर देखें है मगर कोरोना जैसी अदृश्य महामारी की तबाही का इल्म तक नहीं किया होगा । कैसे एक झटके में दुनिया के बड़े से बड़े छोटे से छोटे यहां तक की ताकतवर मुल्कों को भी तितर बितर कर दिया । और विज्ञान , ज्योतिष धरा का धरा रह गया । साल 2019 में चीन के वहां से निकला खतरनाक अदृश्य वायरस अपने पहले ही प्रकोप में ना जाने कितनों को लील गया । इसके बाद 2020 में उसी वायरस ने नाम बदलकर तो तांडव किया उससे तो दुनिया ही हिल गई ।

मसलन अब नए नाम से अपने प्रकोप को अंजाम देने की तैयारी मे जुट गया है ओमिक्रोन । करोना वायरस की वैक्सीन बनाने वाली कई कम्पनियों ने दावा तक ठोक डाला की ओमिक्रोन तो कहर बरपाएगा ही साथ ही आने वाले भविष्य में नई महामारी और भी जानलेवा साबित होंगी । ऑक्सफोर्ड एकस्ट्राजेनेका नामक कम्पनी जो वैक्सीन बनाती है उसके प्रोफेसर डेम सारा गिलबर्ट ने कहा है कि नए वायरस ओमिक्रोन पर वैक्सीन ज्यादा कारगर साबित नहीं होगी । हो सकता है हमें आगे कई साल ऐसे ही बदले हुए नाम के साथ वायरस का सामना करना पड़े । और हमारी जिंदगी बद से बत्तर हो जाए । इसलिए सावधानी ही विकल्प है ।

ओमिक्रोन पर एंटीबॉडी का असर कम होगा

आज पूरी दुनिया का एक वर्ग इस वायरस से बेखबर हो रहा हो यह जानते हुए कि वैक्सीन की डोज तो ले ली गई है फिर इसको इतना क्यों भाव देना । कई देशों में सरकारी आंकड़े यह कहते है की वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद भी कई लोग नए वायरस की गिरफ्त में आए है और ओमिक्रोन ने उन्हें मौत के आलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं दिया है । इसके बारे में बात करते हुए प्रोफेसर गिलबर्ट ने कहा कि इसके इस्पैक प्रोटीन में म्यूटेशन है जो वायरस के संक्रमण को बढ़ाने का काम करता है ।ये वेरिएंट कुछ अलग है हो सकता है कि यह वैक्सीन के प्रभाव पर बेअसर रहे । जब तक नए वेरिएंट पर विज्ञान अपनी रिपोर्ट नहीं देता हमें सतर्क रहना होगा ।

ऐसे वेरिएंट से कैसे निपटेगा विज्ञान

दुनिया के सामने जो पहली रिपोर्ट आई थी कि चीन के वुहान शहर की एक लैब में प्रयोग हो रहा था और उसी लैब से यह वायरस वुहान की बाजार में पहुंचा और लोगों के जरिए एक दूसरे तक इस वायरस ने दस्तक दी । कुछ समय बाद यातायत चलता रहा एक देश से दूसरे देश का आवागमन भी चलता रहा और आहिस्ते आहिस्ते पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले लिया । सबकुछ इतनी तेजी से हो रहा था कि क्या डाक्टर क्या वैज्ञानिक सब सिर्फ तमाशा देखते रहे ।

वायरस को कैसे रोका जाए कौन सी दवा बनाई जाए किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था हर सेकेण्ड में मौत किसी न किसी गले लगा रही थी और विज्ञान करोना के आगे बेबस था लाचार था एक अदृश्य वायरस ने दुनिया को उसकी औकात बता दी तो विज्ञान का घमंड तोड दिया । अमेरिका , रूस , भारत , ब्रिटेन , चीन जैसे बड़े मुल्कों के परमाणु बम घूरते रहे और अदृश्य वायरस ने करोड़ों लोगों को लील कर ही माना ।

मगर वैक्सीन तो बन गई लोगों के पास पहुंच भी गई । कईयों ने तो लगवा भी ली । और आज डाक्टर , वैज्ञानिक जरूर राहत की सांस ले रहे होंगे मगर , आने वाले भविष्य में अगर ऐसे ही कोई वायरस ने जन्म ले लिया तो विज्ञान कैसे निपटेगा । क्योंकि आज जिस युग में दुनिया खड़ी है तकनीक और विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली है फिर भी हमने जो मंजर करोना की शुरुआत में देखा था कि विज्ञान कैसे हताश था आगे ऐसा न हो इसके लिए विज्ञान और दुनिया के सभी मुल्कों को एक साथ आना होगा । और हर चुनौती से साथ में निपटना होगा । तभी यह दुनिया बचेगी । नहीं तो एक ऐसा समय आयेगा की जब दुनिया शुरू हुई थी ठीक वैसी ही शुरुआत फिर से होगी । तब भी हम नहीं थे देखने के लिए और कल भी नहीं होंगे ।

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