Farming : फार्मिंग क्या है, और कैसे करें

फार्मिंग नाम सुनते ही खेती बाड़ी जैसी बात लगती है, जी हां सही सुना यह खेती से ही जुड़ा है बस फर्क इतना है कि फार्मिंग अंग्रेजी शब्द है । चलिए समझ लेते है फार्मिंग क्या है भूमि की प्रकति, जलवायु से जुड़ी तमाम विशेषताएं और सिंचाई सुविधाओं के आधार पर खेती करने के कई पैमाने होते है । और इसीलिए भारत में किसान विभिन्न प्रकार की खेती करते है । फार्मिंग के कई प्रकार है उनमें से कुछ हम आपको बताएंगे ।

खेती से कमाई कैसे करें (How To Earn From Farming)

बहुत से ऐसे लोग है जो खेती को अपनी जीविका और भविष्य मानते है वैसे आपके पास अगर थोड़े से भी खेत है तो आपका कमाई का जरिए बन सकते है । खेती से पैसा कमाने की चाहत रखते है तो इसके लिए आपके पास खुद की जमीन होना जरूरी है । इसके लिए कम से कम एक एकड़ जमीन होना चाहिए । और पानी का प्रबन्ध होना चाहिए । कोशिश करें अपने खेतों में अच्छी फसल बोएं अच्छे बीज का उपयोग करें । कीड़ा लगने पर कीटनाशक दवा का उपयोग करें फसल की देखभाल करते रहे । जितनी अच्छी आपकी फसल होगी कमाई उतनी अच्छी होगी ।

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग क्या है (What is Contract Farming)

देश में 70 प्रतिशत अनाज हमारे किसान उगाते है क्योंकि भारत एक कृषि प्रधान देश है और लगभग हर कोई खेती करता है और किसान ज्यादातर अपनी खेती कुदरत के भरोसे करता है मतलब प्रकति के अनुसार । कभी बारिश तो कभी सूखे की मार झेलनी पड़ती है । ऐसे किसान परेशान होता है आइए जानते है कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग ।

इसका मतलब होता है कि किसान खेती अपनी जमीन पर करेगा लेकिन वह अपने लिए नहीं बल्कि दूसरे के लिए करेगा । दूसरों के लिए की जाने वाली खेती एक कॉन्ट्रैक्ट की तरह होती है इसमें कोई व्यक्ति या कम्पनी हो सकती है फसल उगाने से पहले उसका मूल्य तय हो जाता है और मौसम के हिसाब के फसल उगाने का काम किया जाता है । इसमें किसान की कोई लागत नहीं लगती । खाद बीज पानी ये सभी चीजें कॉन्ट्रेक्टर देता है

मल्टी लेयर फार्मिंग कैसे करें

इसके लिए किसान सबसे पहले अपने खेतों में फसल लगाए जो की जमीन के अंदर उगती हो । इसके साथ ही किनारे और बीच में जहां जगह दिखे वह फूल और अन्य पौधे भी लगा सकते है इसमें छायादार तथा फलदार दोनों पेड़ हो सकते है इससे लाभ यह होगा कि किसान एक फसल के साथ अन्य खेती भी कर सकता है

पतंजलि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग

योग गुरु बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद प्रोडक्ट की डिमांड सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी है आपको पतंजलि से जुड़ी हर चीज आज बाजार में उपलब्ध है मतलब दवाइयों से लेकर खाने पीने तक ।

आप भी कम्पनी के डिस्ट्रीब्यूटर बन सकते है इसके साथ साथ आप कॉन्ट्रैक्ट फर्मिग भी कर सकते है । पतंजलि आयुर्वेद रिटेल आउटलेट खोलने के लिए ग्रामीण व शहरों में अच्छा मौका देती है । कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लिए कम्पनी सबसे पहले जानकारी हासिल करती है फिर लोकेशन व अन्य चीजे तय करती है

फलों को खेती (Fruit Agriculture)

Fruit Agriculture

फल जीवन के लिए लाभदायक होता है और केवल फलों का उत्पादन करना ही Fruitculture कहलाता है । फल विटामिन एवम खनिज लवणों का उत्तम साधन है फलों का स्वाद ही लोगों को भाता है इसमें भी खट्टे मीठे, का स्वाद ही लोगों के लिए प्रिय बनता है ।

फलों का चुनाव जलवायु एवम स्थान की उपलब्धता पर निर्भर करता है.

बागवानी फार्मिंग

बागवानी फार्मिंग को आसान भाषा में समझिए तो फलों , फूलों और सब्जियों की खेती को ही बागवानी फार्मिंग कहते है । बागवानी करना बहुत लोगों को पसंद आता है लोग अपने पसंद के अनुसार फार्मिंग करते है कोई फलों की , कोई फूलों की तो कोई सब्जियों की बागवानी करता है और खूब पैसे कमाता है यह एक प्रकार का अच्छा खासा रोजगार है ।

बागवानी करने वाले को यह पता होना चाहिए कि किस मौसम में क्या उगाया जाता है कितनी मात्रा होनी चाहिए बीच और खाद की , कितना पानी चाहिए , कीड़े मकोड़े से कैसे सुरक्षित रखें अपनी बागवानी को । बागवानी करना आसान भी नहीं है तो कठिन भी नहीं है ।

फूलों की खेती

फूल का उपयोग बीते दशकों की अपेक्षा में बढ़ोत्तरी हुई है और फूलों का उत्पादन करना ही floriculture कहलाता है। फूलों का उपयोग खासकर सजावट के लिए अधिक उपयोगी माना गया है ।

Flower Farming in India

नई नई किस्म के फूलों की खेतों होती है जो आकर्षक लगती है फूलों की खूब मांग रहती है

मधुमक्खी पालन

मधुमक्खी की उपयोगिता सिर्फ शहद से ही समझ आती है और लोग मधुमक्खी पालन को व्यसायिक मानते है इसे Bee farming कहते है मधुमक्खी पालन ही मधुमक्खी कालोनियों का रखरखाव है । अधिकांश मधुमक्खियां जीन एपिस मधुमक्खियां होती है । इसने शहद की उत्पत्ति तो होती है और ऐसी ही मधुमक्खियां रखी जाती है कुछ डंक वाली भी होती है ।

मछली पालन

मछलियों को व्यवसायिक स्तर पर पालना ही मछली पालन की श्रेणी में आता है । आज आप देखें तो देश के कोने कोने में मछली पालन का का व्यवसाय बहुत तेजी से बढ़ रहा है । अच्छा मुनाफा कमा रहे है लेकिन उनकी अच्छी देखभाल न करने का नतीजा होता है कि वो मर जाती है और कमजोर मछलियों की कीमत कम हो जाती है ।

रेशम कीट पालन

रेशम कीट से रेशम के कीड़ों की खेती होती है । मतलब रेशम के कीड़ों का उत्पादन ही sericulture कहलाता है रेशम के कीड़े कई तरह की व्यवसायिक प्रजितिया है

मशरूम की खेती

मशरूम एक तरह का कवक है और मशरूम की खेती करना ही Fungiculture कहलाता है । कवकनाशी मशरूम और अन्य कवक की खेती होती है । कवक बढ़ने से भोजन , दवा निर्माण सामग्री , व अन्य उत्पादों को प्राप्त किया जाता है । मशरूम की खेती लोग कम करते है इसकी पैदावार भी कम होती है इसलिए यह महंगी होती है.

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