OTT Platform: छोटे शहर मचा रहे ओटीटी पर धूम

चलता फिरता सिनेमा और मनोरंजन का आधुनिक मंच ओवर द टॉप मतलब ओटीटी पर देशी स्टाईल की पृष्ठभूमि को कहानियां खूब मशहूर हो रही है । आज दुनिया कितनी भी आगे क्यों न निकल गई हो मगर कुछ फिल्में ऐसी भी है जो आधुनिकता के बीच भारतीय दर्शकों को अपनी जड़ों में रहने का अहसास दे रही है ।

आज ओटीटी पर बहुत सारी ऐसी फिल्में है जो छोटे शहरों को फिल्म की रील में पिरो रखी है । साथ ही यह बात भी सही है कि डिजिटल प्लेटफार्म ने छोटे शहरों और गांवों कि कहानियां को बताने के साथ साथ नई प्रतिभाओं को भी खोजने का काम किया है । कुछ कलाकार जो सीधे बड़े पर्दे पर नहीं दिखते उन्हें ओटीटी ने एक माध्यम दिया है और उसमे खूब कला दिखाई है । वेब सीरीज के जरिए नए कलाकारों को अच्छा काम मिला पैसे मिले जो फिल्म सिटी के चक्कर काट काट कर थक गए थे उन्हे एक प्लेटफार्म मिला । कहानियों के जरिए अपने गांव के नाम और खूबसूरती को भी फेसम कर रहे है।

छोटे शहर वाले सबसे आगे है

करोना के संकट में फिल्म देखने और रिलीज करने का सिर्फ एक माध्यम था ओटीटी । जिसे लोगों ने बहुत जल्दी स्वीकार कर लिया । और एक से बढ़कर एक फिल्म वेब सीरीज ने जलवा बिखेरा । पसंद भी की गई । मौजूदा दौर मे जिस तरह से बड़े पर्दे के सामने ओटीटी प्लेटफार्म एक चुनौती की तरह नजर आ रहा है। इसका पूरा श्रेय मोटे तौर पर ओटीटी और प्रसारित मनोरंजन रीजनल कंटेंट और टीयर वन और टू के उपभोक्ता को जाता है ।

ओटीटी प्लेटफार्म पर जिस तरह से निर्माता और फिल्मकारों ने कंटेंट परोसा है उससे दर्शक बिल्कुल भी बोर नहीं हुए । और कहानी से लेकर पात्र की जमकर तारीख और सराहना कि । खासतौर पर वो , जो इससे पहले ओटीटी के लिए शहरी चकाचौंध से लबरेज सामग्री प्रस्तुत कर रहे थे । एक प्रसिद्ध ओटीटी ओटीटी मंच द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार साल 2018 में 54 फीसदी योगदान था उसने नॉन मेट्रो सिटीज है । जो 2019 में 63 फीसदी हुआ ।और अभी भी गति तेज हो रही है । अच्छी बात यह है कि हिंदी भाषा के अलावा क्षेत्रीय भाषा का रीजनल कंटेंट बहुत पसंद किया गया।

बॉक्स ऑफिस और फिल्म कहानी का तालमेल

ओटीटी प्लेटफार्म ने एक गलत फहमी तो दूर ही कर दी की जो कलेक्शन बॉक्स ऑफिस को मिलता था शायद वह ओटीटी पर न मिले । लेकिन कुछ हद तक तो ओटीटी ने कलेक्शन के तौर पर सिनेमा के नजदीक आया । बॉक्स ऑफिस पर 200-300 करोड़ी कलेक्शन का जलवा दिखाने के बाद अब छोटे शहर और कस्बों की कथा कहानियां की धमक ओटीटी पर भी सुनाई दे रही है ।हालाकि यह बात समझने वाली है कि रीजनल कंटेंट का कब्जा पहले से ही अच्छा खासा है । आइए कुछ वेब सीरीज की बात करते है ।

मिर्जापुर एक प्रसिद्द को लेकर ब्लाकबस्टर फिल्म से कम नहीं आका जा सकता । इसमें कोई दो राय नहीं है कि ओटीटी और इसने हद से ज्यादा सुर्खियां बटोरी । और प्रतीकात्मक साबित हुई । यह क्षेत्रीय जगत पर आधारित बनी थी और देशी स्टाईल ही इसका रंगरूप है जिसे दर्शकों ने बहुत पसंद किया । अपराध की जगत पर इस सीरीज और शोज को खूब बढ़ावा मिला । बिच्छू का खेल , भौकाल , रकतांचल , अपहरण , बीहड़ का बागी , पूर्वांचल डायरीज , रंगबाज आदि । दूसरी तरफ ओटीटी पर रिलीज हुई फिल्मों ने भी जो सुर्खियां बटोरी है । छलांग , राम प्रसाद की तहरनविं, मिमी , 14 फेरे , हसीन दिलरुबा , रूही , कागज जैसी फिल्मों में छोटे शहरों की आम जिंदगी से जुड़ी तस्वीर और कहानी खूब देखने को मिली ।

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