UP Election 2022: अंतिम चरण के मतदान में वोट पर चोट करने को तैयार मतदाता

 

यूपी चुनाव : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के छठे चरण की वोटिंग हो चुकी है ऐसे में आज यूपी चुनाव के लिए मतदाता सातवें और अंतिम चरण में वोट पर चोट करने को तैयार है आखिरी चरण के नौ जिलों की 54 सीटों पर मतदान हो रहा है जिसमे आजमगढ़, गाजीपुर , जौनपुर , वाराणसी, भदोही शामिल है इस चरण में उत्तर प्रदेश के तीन मंत्री चुनावी मैदान पर है वाराणसी दक्षिण विधानसभा सीट से राज्य के पर्यटन व सांस्कृतिक मंत्री नीलकंठ तिवारी है पंजीयन मंत्री रविन्द्र जयसवाल, दिव्यांग कल्याण मंत्री अनिल राजभर की किस्मत का फैसला जनता ईवीएम पर कैद कर देगी । यहां कुछ सीटें बड़ी खास है क्योंकि पिछले कुछ समय से विवादों में रहे ये प्रत्याशी भी जोर आजमाइश के लिए चुनावी मैदान पर डटे है भाजपा छोड़कर सपा का दामन थामने वाले गाजीपुर की जहूराबाद सीट से सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर है मऊ सदर से बांदा जेल ने बन्द मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी , और भदोही से विधायक अजय मिश्रा जैसे दिग्गज मैदान पर है

क्या था 2017 में जीत का समीकरण

इसमें कोई शक नहीं है इस बार का चुनाव उतना ही पेचीदा और कठिन खासकर बीजेपी के लिए । जितनी आसानी से बीजेपी ने साल 2017 यूपी विधानसभा चुनाव में 54 सीटों में 29 पर जीत दर्ज की थी इस बार बीजेपी अपने ही गढ़ में खतरा महसूस कर रही है पिछले चुनाव में बीजेपी सहयोगी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी यानी ओम प्रकाश राजभर की पार्टी ने 3 सीटें जीती थीं निषाद पार्टी जिसके अध्यक्ष संजय निषाद है उन्होंने एक सीट कब्जाई थी बसपा ने 6 सीट और समाजवादी पार्टी ने 11 सीटों पर कब्जा किया था लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है पिछले चुनाव में जो समीकरण बने थे ठीक उससे उलट समीकरण इस बार बनते दिख रहे है मतलब भाजपा के लिए यह खतरे की आहट है आज 9 जिलों की 54 सीटों पर 2.6 करोड़ मतदाता अपने विधायक का फैसला करेगा जिसमें 1.9 करोड़ पुरुष है और 97.8 करोड़ महिला वहीं 1027 थर्ड जेंडर है ।

अब तक कौन किस पर पड़ा भारी

बस आज से तीन दिन और फिर उत्तर प्रदेश की जनता को 10 मार्च को 12 बजे सूबे का मुख्यमंत्री और अपने क्षेत्र का विधायक मिल जाएगा।  उत्तर प्रदेश में कुल सात चरणों में वोटिंग हुई है जो चुनावी गणित बता रहा है उसके लिहाज से पहले तीन चरण समाजवादी के खेमे में गए है मतलब पश्चिमी यूपी के चरण । राजनीतिक विश्लेषकों के आधार पर चौथे चरण से स्थितियां बदली है और बीजेपी के लिए चौथे चरण से लेकर छठे चरण के मतदान उसके पक्ष में गए है लेकिन यह सिर्फ अनुमान है असल में मतदाताओं ने क्या फैसला किया है इसका नतीजा तो गुरुवार यानी 10 मार्च को ही पता चलेगा । क्योंकि ऐसा कहा माना जा रहा था कि इस बार जनता ने अपना वोट दिल में दबाकर रखा है किसी के सामने जाहिर नहीं होने दिया और इवीएम के सामने ही अपना अंतिम फैसला सुनाया। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में सिर्फ और सिर्फ लड़ाई सपा और बीजेपी के बीच थी अन्य दल तो कहीं नजर ही नहीं आ रहे थे।

बसपा – कांग्रेस की स्थित क्या है

कांग्रेस वो राजनीतिक पार्टी है जिसने उत्तर प्रदेश में एक छत्र राज किया है लेकिन पिछले 32 सालों से यूपी की धरती पर कांग्रेस का अस्तित्व का खत्म सा हो गया है जिस उत्तर प्रदेश की जनता ने कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी को  कई विधानसभा चुनाव में लखनऊ की गद्दी पर बैठाया हो फिर ऐसा क्या हुआ कि उतनी ही तेजी से उसे उतार दिया और आज कांग्रेस इस विधानसभा चुनाव में कहीं भी नहीं है कांग्रेस खुद इस बात को जानती और समझती है तो बहुजन समाज पार्टी जिसने 2007 विधानसभा चुनाव में 202 सीटें जीतकर बहुमत की सरकार बनाई थी आज पिछले दो चुनावों से बसपा जनता के मन में जगह नहीं बना पाई है दलितों , ब्राह्मण , और मुस्लिमो कि हितैषी समझी जाने वाली बसपा के पास आज तीनों ही वर्ग के मतदाता छिटक गए और नाराज भी है इस विधानसभा चुनाव में बसपा चमत्कार तो नहीं कर सकती लेकिन किसी पार्टी की डूबती नैया को बचा सकती है ।

 

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