WHAT IS FIXED TERM CONTRACT : क्या होता है फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट , जानिए पूरी जानकारी

 

 

फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट : जीवन जीने के लिए रुपयों कि जरूरत होती है उसके लिए काम करना पड़ता है नौकरी करनी पड़ती है । लेकिन उसमें भी एक समस्या होती है कई बार नौकरी लंबी अवधि के लिए होती है तो कई बार कम्पनी बीच में ही कर्मचारी को निकाल देती है । ऐसे में किसी कर्मचारी को बीच में से नौकरी से निकालना उसके लिए परेशानी का सबब बन जाता है इसलिए कुछ जॉब को हम फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट कहते है आइए यह क्या होता है उसे समझते है ।

किसे कहते है फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट

इसे हम निश्चित अवधि रोजगार भी कहते है फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट एक अनुबंध है । जिसमे कम्पनी एक कर्मचारी को निश्चित अवधि के लिए काम पर रखती है इसमें ज्यादातर मामलों में कम्पनी कर्मचारी को एक वर्ष के लिए ही रखती है लेकिन उसके काम और अच्छे व्यवहार को देखते हुए कम्पनी उसकी समय सीमा में बढ़ोत्तरी कर देती है । आपको बता दें कि फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट सर्विस में कर्मचारी कम्पनी में पैरोल पर नहीं होता । एक जरूरी बात यह भी है कि कम्पनी कर्मचारी को फिक्स्ड समय में रखते हुए वेतन तय कर लेती है जिसके बाद उसकी समय सीमा तक सैलरी में बदलाव नहीं होता ।निश्चित नौकरी के लिए ऐसे अनुबंध नहीं किए जाते । यह

किस काम के लिए रखे जाते है फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट एम्प्लॉय

किसी अवधि के लिए सिर्फ कम्पनी ही कर्मचारी को नहीं रखती इसमें , शिक्षा संस्थान , फैक्ट्री , मील, या फिर कोई कारखाना हो सकता है इसमें काम करने वाले मजदूर , लेबर और कर्मचारी निश्चित समय के लिए रखे जाते है । काम करने वाला जिस भी फिल्ड मे जाता है उसे रखने से पहले मालिक पूरी बात बताता है कि इतना काम करना है इतने दिन में करना इसके लिए इतने पैसे मिलेंगे । अगर काम अच्छा लगा तो अवधि को बढ़ाया जा सकता है । इसमें इनके काम को देखरेख के लिए सुपरवाइजर रखे जाते है कम्पनी के मालिक को यह रिपोर्ट करते है ।

क्या फिक्स्ड इंप्लॉय को परमानेंट किया जा सकता है

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि कई बार कम्पनी , कारखाने , फैक्ट्री , मील, प्राईवेट संस्थान कर्मचारियों को काम के लिए निश्चित अवधि के लिए रोजगार देती है फिर उनके काम को देखते हुए कुछ महीने और इजाफा कर देती है और उसी के हिसाब से सैलरी मिलती है लेकिन लेकिन क्या किसी फिक्स्ड इंप्लोय को परमानेंट रखा जा सकता है जी हां ऐसा होता है और कई कम्पनी सरकार या प्राइवेट ऐसा करती है कम्पनी यह देखती है कि इसने कम्पनी के लिए कितना समय दिया है एक लंबे समय के बाद उस कर्मचारी को परमानेंट रख लेती है ।

 

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